Updated: May 25, 2026
हमारे हिन्दू धर्म में अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास को बहुत ही पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। यह महीना भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, दान और कथा सुनने से व्यक्ति के जीवन के दुख, संकट और आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
विशेष रूप से “गजेन्द्र मोक्ष कथा” का पाठ और श्रवण अधिक मास में बहुत फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि श्रद्धा और विश्वास से यह कथा सुनने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के बड़े से बड़े संकटों से राहत मिल सकती है।
पुराणों में वर्णित यह कथा सिर्फ एक हाथी और मगरमच्छ की कहानी नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के अहंकार, कठिनाइयों और भगवान पर पूर्ण विश्वास की अद्भुत सीख देती है।
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति के अनुसार चलता है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य की गति पर आधारित होता है। दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। यही अंतर लगभग तीन साल में एक अतिरिक्त महीने के रूप में जुड़ता है, जिसे “अधिक मास” कहा जाता है।
इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” भी कहा जाता है क्योंकि भगवान विष्णु ने इसे अपना प्रिय महीना माना था।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में:
करने से कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है।
गजेन्द्र मोक्ष कथा भगवान विष्णु की कृपा और सच्ची भक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है।
कहा जाता है कि जब व्यक्ति अपने जीवन में चारों तरफ से परेशानियों में घिर जाता है और कोई रास्ता नहीं दिखाई देता, तब सच्चे मन से भगवान को याद करने पर भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।
इसी संदेश को गजेन्द्र मोक्ष कथा में बहुत सुंदर तरीके से बताया गया है।
पुराणों के अनुसार बहुत समय पहले “त्रिकूट पर्वत” के पास एक विशाल और सुंदर सरोवर था। उस सरोवर में एक शक्तिशाली हाथी रहता था जिसका नाम “गजेन्द्र” था। वह हाथियों का राजा था और अपने बल पर उसे बहुत गर्व था।
एक दिन गजेन्द्र अपने परिवार के साथ उस सरोवर में स्नान करने गया। पानी में उतरते ही एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया।
गजेन्द्र ने अपनी पूरी ताकत से खुद को छुड़ाने की कोशिश की। दूसरे हाथियों ने भी उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन मगरमच्छ की पकड़ बहुत मजबूत थी।
धीरे-धीरे समय बीतता गया। गजेन्द्र की ताकत कम होने लगी, लेकिन मगरमच्छ पानी में होने के कारण और मजबूत होता गया।
जब गजेन्द्र को लगा कि अब कोई भी उसे नहीं बचा सकता, तब उसने अपना अहंकार छोड़ दिया और गंभीर पीड़ा मे होते हुये भी सरोवर से कमाल पुष्प अपनी सूंड से तोड़कर ऊपर आकाश की और उठाकर पूरे मन से भगवान श्रीहरी विष्णु को पुकारा।
उसने कहा:
“हे प्रभु! मैं आपकी शरण में हूं। अब केवल आप ही मेरी रक्षा कर सकते हैं।”
गजेन्द्र की सच्ची पुकार सुनकर भगवान विष्णु तुरंत वैकुंठ से अपने वाहन गरुड़ पर बैठकर पहुंचे।
भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध कर दिया और गजेन्द्र को मुक्त कर दिया।
कहा जाता है कि मगरमच्छ भी अपने पिछले जन्म के श्राप से मुक्त हो गया। इसी घटना को “गजेन्द्र मोक्ष” कहा जाता है।
गजेन्द्र मोक्ष कथा सिर्फ धार्मिक कहानी नहीं बल्कि जीवन की बड़ी सीख भी देती है।
गजेन्द्र अपनी ताकत पर गर्व करता था, लेकिन संकट आने पर उसका बल काम नहीं आया।
जब सभी रास्ते बंद हो गए तब भगवान विष्णु ने अपने भक्त की रक्षा की।
जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, विश्वास और धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए।
श्रद्धा और विश्वास से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में गजेन्द्र मोक्ष कथा सुनना बहुत पुण्यदायी माना जाता है।
कहा जाता है कि इस कथा के श्रवण से:
कई लोग अधिक मास में नियमित रूप से गजेन्द्र मोक्ष का पाठ भी करते हैं।
सुबह और शाम श्रीहरि विष्णु की आरती और मंत्र जाप करें।
गजेन्द्र मोक्ष कथा, श्रीमद्भागवत और गीता पाठ करना शुभ माना जाता है।
गरीबों को भोजन, वस्त्र और जल दान करें।
इस महीने सात्विक जीवन और शुद्ध भोजन को महत्व दिया जाता है।
सेवा और दया को पुरुषोत्तम मास में विशेष महत्व दिया गया है।
अधिक मास भगवान विष्णु की भक्ति और आत्मशुद्धि का पवित्र समय माना जाता है। इस महीने में गजेन्द्र मोक्ष कथा सुनना और पढ़ना बेहद शुभ माना गया है।
यह कथा हमें सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, सच्ची श्रद्धा और विश्वास से भगवान की कृपा जरूर प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा से की गई भक्ति व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक बदलाव ला सकती है।