जया एकादशी 2025 तारीख, जया एकादशी करने से नकारात्मकता होती है दूर जानिए अद्भुत फल

जया एकादशी 2025 तारीख, जया एकादशी करने से नकारात्मकता होती है दूर जानिए अद्भुत फल

Updated: February 06, 2025

जया एकादशी 2025 तारीख, जया एकादशी करने से नकारात्मकता होती है दूर जानिए अद्भुत फल

जया एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है, जिसे माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में उल्लेख किया गया है कि इस व्रत को करने से न केवल इस जन्म के, बल्कि पूर्व जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा, जया एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को भूत-प्रेत बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

इस दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और पूरे दिन फलाहार करते हुए भजन-कीर्तन में लीन रहना चाहिए। रात को जागरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अगले दिन द्वादशी को ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का पारण करना चाहिए। जया एकादशी व्रत का फल हजारों अश्वमेध यज्ञों के समान माना गया है, इसलिए इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखना अत्यंत पुण्यकारी होता है।

जया एकादशी व्रत करने से प्राप्त होने वाले फल

(1) पापों का नाश
जो व्यक्ति इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा और नियम से करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

(2) मोक्ष की प्राप्ति
यह व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

(3) पितरों की शांति
इस व्रत को करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है, जिससे वे स्वर्ग में स्थान प्राप्त करते हैं।

(4) मानसिक शांति और सुख-समृद्धि
व्रत रखने वाले व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

(5) भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति
ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।

जया एकादशी शुभ मुहर्त 2025

ब्रह्म मुहूर्त – 8 फरवरी को सुबह 05:21 मिनट से 06:13 मिनट तक.
विजय मुहूर्त – 8 फरवरी को दोपहर 02:26 मिनट से 03:10 मिनट तक.
गोधूलि मुहूर्त – 8 फरवरी को शाम 06:04 मिनट से 06:30 मिनट तक.
निशिता मुहूर्त – 9 फरवरी को रात 12:09 मिनट से 01:01 मिनट तक.

जया एकादशी की पूजा विधि

  • प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  • व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन फलाहार करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और श्रीहरि की पूजा करें।
  • रात को जागरण करें और भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें।
  • अगले दिन द्वादशी को ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का पारण करें।

जया एकादशी व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यह व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है, आत्मा को शुद्धि मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि आप अपने जीवन में शांति, सुख और समृद्धि चाहते हैं तो इस व्रत को अवश्य करें।

Frequently Asked Questions

जया एकादशी का व्रत क्यों किया जाता है?
जया एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
जया एकादशी व्रत करने से कौन से लाभ मिलते हैं?
इस व्रत से पापों का नाश, भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जया एकादशी की पूजा कैसे करें?
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करें, व्रत रखें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का पारण करें।
क्या जया एकादशी व्रत में अन्न खा सकते हैं?
नहीं, इस दिन केवल फलाहार किया जाता है और अगले दिन पारण किया जाता है।
जया एकादशी का व्रत कौन कर सकता है?
कोई भी व्यक्ति इस व्रत को कर सकता है, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष।