Updated: May 22, 2026
हमारे देश भारत में गर्मियों का मौसम हर साल भयानक होता है, लेकिन मई के आखिरी और जून की शुरुआत के कुछ दिन सबसे ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं। इन्हीं दिनों को “नौतपा” कहा जाता है। साल 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक चलेगा। इस दौरान उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंच सकता है और तेज लू चलती है जिस से लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है।
हर साल नौतपा के दौरान मौसम विभाग हीटवेव अलर्ट जारी करता है। सड़कें तपने लगती हैं, गर्म हवाएं चलती हैं और शरीर में पानी की कमी तेजी से होने लगती है। ऐसे समय में थोड़ी सी लापरवाही भी डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि नौतपा क्या होता है और इससे बचने के सही तरीके क्या हैं, इसकी पूरी जानकारी हर व्यक्ति को हो।
“नौतपा” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — “नौ” यानी 9 और “ताप” यानी गर्मी। इसका मतलब है साल के सबसे ज्यादा गर्म माने जाने वाले 9 दिन। भारतीय परंपरा और ज्योतिष के अनुसार यह समय तब शुरू होता है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। आमतौर पर यह अवधि 25 मई से 2 जून के बीच मानी जाती है।
लोक मान्यताओं में नौतपा को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दौरान सूर्य की किरणें धरती पर काफी तीव्र महसूस होती हैं। हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार इसका मुख्य कारण प्री-मानसून हीटवेव, सूखी हवाएं, कम नमी और लगातार तेज धूप होती है।
मई के अंत तक धरती कई हफ्तों की तेज धूप झेल चुकी होती है। जमीन पूरी तरह गर्म हो जाती है और हवा में नमी कम होने लगती है। ऐसे में जब साफ आसमान से सूरज की तेज किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं तो तापमान तेजी से बढ़ जाता है।
नौतपा के दौरान कई राज्यों में सूखी और गर्म हवाएं चलती हैं जिन्हें “लू” कहा जाता है। ये हवाएं शरीर का तापमान तेजी से बढ़ाती हैं। अगर शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता तो व्यक्ति बीमार पड़ सकता है।
लू यानी Heatwave ऐसी गर्म और सूखी हवा होती है जो गर्मियों में दोपहर के समय चलती है। नौतपा के दौरान इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।
लंबे समय तक लू में रहने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स तेजी से कम होने लगते हैं। इससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
अगर समय पर इलाज न मिले तो हीट स्ट्रोक जानलेवा भी हो सकता है।
नौतपा के दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी काम होता है। सिर्फ प्यास लगने पर पानी पीना पर्याप्त नहीं है। शरीर को लगातार पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत होती है।
गर्मी में रोज कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पिएं। बाहर निकलने से पहले और लौटने के बाद पानी जरूर लें।
अधिक पसीना आने पर शरीर से नमक और मिनरल्स निकल जाते हैं। ORS, नींबू पानी, नारियल पानी और छाछ शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।
तरबूज, खीरा, खरबूजा, संतरा और मौसमी जैसे फल शरीर को ठंडक देते हैं और पानी की कमी पूरी करते हैं।
बहुत ज्यादा चाय, कॉफी और शुगर वाले ड्रिंक्स शरीर को डिहाइड्रेट कर सकते हैं।
भूखे पेट धूप में निकलने से कमजोरी और चक्कर आने की संभावना बढ़ जाती है।
सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे ज्यादा खतरनाक होती है। जरूरी काम हो तभी बाहर निकलें।
कॉटन के कपड़े शरीर को ठंडा रखते हैं और पसीना जल्दी सुखाते हैं।
धूप में निकलते समय टोपी, गमछा या छाता जरूर इस्तेमाल करें।
अगर बाहर काम करना जरूरी हो तो बीच-बीच में छांव में आराम करें।
कमरे में हवा आने-जाने की व्यवस्था रखें। जरूरत हो तो कूलर या पंखे का उपयोग करें।
बच्चे और बुजुर्ग गर्मी से जल्दी प्रभावित होते हैं, इसलिए इन्हें ज्यादा देर धूप में न रहने दें।
गर्मी के दिनों में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन सबसे बेहतर माना जाता है।
गर्मियों में अपना ध्यान रखना तो जरूरी है लेकिन बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।